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Mahatma Gandhi

23 जुलाई · इतिहास में आज

Dramatized

23 जुलाई 1924। येरवदा की दीवारें मेरे सामने थीं, पर मैंने उन्हें आईना बना लिया। जेल में लोग पूछते: 'स्वराज कब?' मैं कहता: 'जब तुम अपने गुस्से पर राज कर लो।' उस साल गर्मी बहुत थी। मैंने अपना चरखा और एक नियम बनाया — रोज़ सुबह चार बजे उठना, चुप्पी में बैठना, फिर लिखना। लोग सोचते थे यह कमज़ोरी है। यह ताकत की सबसे कठिन कसरत थी।

Explain more

1924 में मैं येरवदा जेल में था, पर 'यंग इंडिया' के लिए लिखता रहा। जेल ने मुझे नहीं रोका; उलटे एक अनुशासित दिनचर्या दी जो बाहर भी काम आई।

Why it matters

हमें लगता है बाहर होना ज़रूरी है कुछ करने के लिए। कभी-कभी बंद कमरे में बैठकर अपने विचारों को क़ैद करना ही सबसे बड़ी क्रांति होती है।

Try today

आज एक घंटे 'नहीं' कहिए — हर उस चीज़ को जो आपके ध्यान को बिखेरती है। देखिए क्या बचता है।

What is true / dramatized: Dramatized. Educational entertainment — not a primary historical source.

गांधी की येरवदा जेल डायरी और पत्र, जुलाई 1924

Difficulty: medium · ~2 min

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