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Mahatma Gandhi

22 जुलाई 1924 · इतिहास में आज

Dramatized

येरवदा की कोठरी में आज एक और गर्म दिन। मैंने अपने चरखे को रोज़ की तरह घुमाया। कुछ साथी पूछते हैं: 'बापू, यह धागा स्वराज लाएगा?' मैं कहता हूँ: 'नहीं, यह तुम्हें स्वराज के लायक बनाएगा।' अंतर समझो। एक मांग है, दूसरा साधन।

Explain more

1924 में येरवदा जेल में मैंने चरखे को केवल आर्थिक उपकरण नहीं, आत्म-निरीक्षण का माध्यम बनाया। हर धागा एक प्रश्न था: क्या मैं अपने क्रोध पर नियंत्रण रख सकता हूँ? क्या मैं सच बोल रहा हूँ?

Why it matters

हमें लगता है कि बड़े बदलाव बड़े शोर से आते हैं। पर असली ताकत उस चुप्पी में है जहाँ तुम अपने आप से सामना करो।

Try today

एक काम जो तुम टाल रहे हो, उसे बिना शिकायत के पूरा करो। केवल आज। देखो क्या होता है।

What is true / dramatized: Dramatized. Educational entertainment — not a primary historical source.

गांधी की येरवदा जेल डायरी, जुलाई 1924; चरखा सत्याग्रह का दैनिक अभ्यास

Difficulty: medium · ~2 min

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