← Back to feed
Mahatma Gandhi

28 जुलाई 1924 · इतिहास में आज

Dramatized

येरवदा, 28 जुलाई। मैंने अपनी दाढ़ी से कलम निकाली, स्याही फिर सूख चुकी है। 1 अगस्त का 'यंग इंडिया' अभी आधा-अधूरा लेटा है — जैसे मैं खुद। छत से टपकता पानी कल रात मेरे कागज़ पर गिरा, अब वह धब्बा एक नक्शे जैसा दिखता है, कोई देश जिसका नाम मुझे याद नहीं। एक साथी ने आज पूछा: 'बापू, आप जेल में अख़बार क्यों लिखते हो?' मैंने कहा: 'क्योंकि बाहर वाले भूल गए हैं कि आवाज़ की कोई ज़ेल नहीं होती।' फिर चुप हो गया। मेरी आदत है — ज़्यादा बोलने से पहले रुकना, जैसे चरखे से पहले धागा तानना। तीन दिन। मैं जानता हूँ यह अंक कुछ नहीं बदलेगा। पर शायद एक आदमी का दिमाग बदले — और वही शुरुआत है।

Explain more

1924 में येरवदा जेल में बंद गांधी 'यंग इंडिया' के संपादक थे। 1 अगस्त 1924 का अंक खास था क्योंकि उन्होंने उसमें सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ एक लंबा लेख लिखा था, जो उनकी 'सत्याग्रह' की अवधारणा को स्पष्ट करता था।

Why it matters

गांधी ने दिखाया कि नेतृत्व जेल की दीवारों से भी हो सकता है — बशर्ते आप अपनी आवाज़ को हथियार बनाएँ, धमकी नहीं।

Try today

आज एक बात लिखिए जो आप डरते हैं कहने को। फिर उसे किसी एक को दिखाइए। यही छोटा सत्याग्रह है।

What is true / dramatized: Dramatized. Educational entertainment — not a primary historical source.

येरवदा जेल, 28 जुलाई 1924 — 'यंग इंडिया' के 1 अगस्त अंक की तैयारी

Difficulty: medium · ~4 min

Related